हीटवेव से निपटने के लिए 20 शहरों में विशेष रणनीति, स्वास्थ्य विभाग अलर्ट
नई दिल्ली: देशभर में इस समय प्रचंड गर्मी और जानलेवा हीटवेव (लू) का प्रकोप जारी है, जिसने आम जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर रखा है। इस संकट से निपटने के लिए केंद्र सरकार द्वारा देश के 20 प्रमुख शहरों में 'हीट एक्शन प्लान' शुरू करने की महत्वाकांक्षी योजना तैयार की गई थी। परंतु, जमीनी हकीकत इसके उलट नजर आ रही है। गुजरात के अहमदाबाद को छोड़कर शेष 19 शहरों में यह जीवनरक्षक योजना केवल फाइलों और कागजों तक ही सिमट कर रह गई है। नतीजतन, उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश जैसे बड़े राज्यों में अब तक सैकड़ों लोग भीषण गर्मी के कारण अपनी जान गंवा चुके हैं।
प्रशासनिक शिथिलता और बदइंतजामी की मार
स्वास्थ्य और पर्यावरण विशेषज्ञों का स्पष्ट मानना है कि इस त्रासदी का सबसे बड़ा कारण प्रशासन द्वारा समय रहते उचित तैयारियां न करना है। जब शहरों में राहत व्यवस्था, पेयजल आपूर्ति और अस्पतालों में आपातकालीन चिकित्सा इंतजाम पुख्ता किए जाने चाहिए थे, तब संबंधित विभागों ने इस ओर ध्यान नहीं दिया। इसी लापरवाही का नतीजा है कि आज हजारों की संख्या में लोग लू की चपेट में आकर अस्पतालों के चक्कर काट रहे हैं और स्वास्थ्य व्यवस्थाएं पूरी तरह चरमरा गई हैं।
बजट की बर्बादी और कागजी योजनाएं
इस विशेष परियोजना को धरातल पर उतारने के लिए सरकार ने बजट से करोड़ों रुपये का भारी-भरकम फंड आवंटित किया था। इसके बावजूद, अधिकांश चिन्हित शहरों में न तो नागरिकों को जागरूक करने के लिए कोई अभियान चलाया गया और न ही हीटवेव से बचने के लिए आवश्यक मूलभूत सुविधाएं विकसित की गईं। योजना के तहत होने वाले कार्यों की गति इतनी धीमी है कि जब जनता को इसकी सबसे ज्यादा दरकार थी, तब धरातल पर कुछ नजर नहीं आया।
विपक्ष का हमला और भ्रष्टाचार के आरोप
योजना की इस नाकामी को लेकर अब देश में एक बड़ा राजनीतिक विवाद भी खड़ा हो गया है। मुख्य विपक्षी दलों ने इस पूरी परियोजना को एक बड़ा घोटाला करार देते हुए सरकार से उच्च स्तरीय जांच की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि 1 जून से देश में मानसून दस्तक दे देगा, जिससे गर्मी से प्राकृतिक रूप से राहत मिल जाएगी। ऐसे में जब जरूरत थी तब कोई काम नहीं किया गया, और अब जब जरूरत खत्म हो जाएगी, तब कागजों पर काम पूरा दिखाकर करोड़ों रुपये के बजट का हेरफेर (भ्रष्टाचार) किया जाएगा। विपक्ष के अनुसार, यह सरकारी योजनाओं को ठिकाने लगाने की एक पुरानी और दूषित कार्यप्रणाली का हिस्सा है।
प्रशासन का रुख और आगामी दावे
दूसरी तरफ, चौतरफा घिरे प्रशासनिक अधिकारियों और सरकार का कहना है कि योजना पूरी तरह ठप नहीं पड़ी है, बल्कि कई शहरों में इस पर अभी भी काम चल रहा है। प्रशासन ने दावा किया है कि जल्द ही सभी तय शहरों में हीट एक्शन प्लान की योजनाओं को पूरी तरह लागू कर दिया जाएगा और राहत कार्य पूरे कर लिए जाएंगे। हालांकि, वर्तमान में जारी भीषण गर्मी के बीच इन दावों पर जनता और जानकारों का भरोसा डगमगाया हुआ है।
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