आसनसोल: पश्चिम बंगाल की सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली नवनिर्वाचित भाजपा सरकार के फैसलों और बयानों ने राज्य की राजनीतिक सरगर्मियों को एक बार फिर चरम पर पहुंचा दिया है। पिछली सरकार के मुकाबले केंद्र के साथ समन्वय बिठाने और अपनी विचारधारा को मजबूती से लागू करने के क्रम में अब 'वंदे मातरम' को लेकर एक नया विवाद खड़ा हो गया है। जमीयत उलेमा-ए-हिंद के अध्यक्ष अरशद मदनी द्वारा वंदे मातरम पर की गई टिप्पणी के बाद बंगाल सरकार में मंत्री और भाजपा नेता अग्निमित्रा पॉल ने उन पर तीखा पलटवार किया है। पॉल ने दो टूक शब्दों में कहा है कि जो लोग इस देश की मिट्टी को अपनी मां मानने और उसका सम्मान करने में हिचकते हैं, उन्हें इस देश में रहने का अधिकार नहीं होना चाहिए।

इस वजह से भड़का राष्ट्रीय गीतों पर विवाद का नया मोर्चा

इस पूरे राजनीतिक बवाल की जड़ें जमीयत उलेमा-ए-हिंद की हालिया बैठक से जुड़ी हैं, जिसमें राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' को अनिवार्य किए जाने की कोशिशों का कड़ा विरोध किया गया था। मुस्लिम संगठन की ओर से इसे एक विवादित गीत करार देते हुए साफ कहा गया था कि अगर इसे किसी भी रूप में जबरन थोपने या लागू करने का प्रयास किया गया, तो वे इसके खिलाफ देश की शीर्ष अदालतों का दरवाजा खटखटाएंगे। संगठन के इस कड़े रुख के बाद भाजपा खेमे ने इसे देश की संप्रभुता और राष्ट्रीय अस्मिता से जोड़ते हुए राष्ट्रव्यापी बहस में बदल दिया है, जिससे चुनावी माहौल के बाद का राजनीतिक पारा भी चढ़ गया है।

भारत भूमि सिर्फ जमीन का टुकड़ा नहीं बल्कि हमारी मां: अग्निमित्रा

आसनसोल में पत्रकारों से मुखातिब होते हुए कैबिनेट मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने देशभक्ति और राष्ट्रीय कर्तव्यों को सर्वोपरि बताया। उन्होंने भावुक और आक्रामक लहजे में कहा कि भारत कोई महज भौगोलिक सीमा या जमीन का टुकड़ा नहीं है, बल्कि यह करोड़ों देशवासियों के लिए मां के समान पूजनीय है। उन्होंने दलील दी कि जिस पावन मिट्टी ने हमें पाला-पोसा और आगे बढ़ने का अवसर दिया, उसके प्रति कृतज्ञता और सम्मान प्रकट करना हर एक सच्चे नागरिक का बुनियादी और नैतिक कर्तव्य है। भाजपा नेता ने चेतावनी भरे लहजे में यह भी स्पष्ट किया कि देश के भीतर रहने वाले प्रत्येक व्यक्ति को भारतीय कानून और संविधान के दायरे में ही रहकर काम करना होगा, चाहे वह किसी भी मजहब या संप्रदाय से ताल्लुक क्यों न रखता हो।

ध्रुवीकरण के आरोपों को खारिज कर कानून की समानता पर दिया जोर

अपने इस कड़े बयान के बाद विपक्ष द्वारा लगाए जा रहे धार्मिक ध्रुवीकरण के आरोपों का भी मंत्री अग्निमित्रा पॉल ने बखूबी जवाब दिया। उन्होंने साफ शब्दों में इन आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि भारतीय जनता पार्टी किसी धर्म विशेष को निशाना बनाकर राजनीति नहीं कर रही है, बल्कि उसका एकमात्र ध्येय यह है कि देश का कानून और नियम सबके लिए एक समान होने चाहिए। उनके मुताबिक, यदि कोई व्यक्ति भारत की सीमाओं के भीतर शांति और सम्मान से रहना चाहता है, तो उसे यहां की न्याय व्यवस्था के साथ-साथ देश के गौरवशाली राष्ट्रीय प्रतीकों का भी दिल से सम्मान करना ही पड़ेगा।

अरशद मदनी की आपत्तियों ने दिया विवाद को तूल

इस तीखी बयानबाजी की शुरुआत असल में जमीयत प्रमुख अरशद मदनी के उस भाषण से हुई थी, जिसमें उन्होंने भाजपा शासित राज्यों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े किए थे। मदनी ने आरोप लगाया था कि देश के कई राज्यों में धार्मिक मुद्दों को ढाल बनाकर अल्पसंख्यक समुदायों को जानबूझकर राजनीति का शिकार बनाया जा रहा है। उन्होंने समान नागरिक संहिता (UCC) और वंदे मातरम की अनिवार्यता जैसे संवेदनशील विषयों पर अपनी गहरी आपत्ति दर्ज कराई थी। मदनी के इसी रुख को भाजपा के शीर्ष नेताओं ने राष्ट्रविरोधी सोच का हिस्सा बताते हुए देश के कई हिस्सों में उनके खिलाफ मोर्चा खोल दिया है।