स्टालिन और नीतीश का जिक्र कर CPM ने कांग्रेस को घेरा
नई दिल्ली: दिल्ली के कॉन्स्टिट्यूशन क्लब में विपक्षी गठबंधन 'INDIA' की एक बेहद महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें करीब 25 राजनीतिक दलों के वरिष्ठ नेताओं ने हिस्सा लिया। इस बैठक के दौरान कांग्रेस को अपने ही सहयोगी दलों की तीखी नाराजगी और कड़े सवालों का सामना करना पड़ा। सूत्रों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैठक में शामिल कई क्षेत्रीय नेताओं ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के रवैये और कांग्रेस पार्टी की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े किए। समाजवादी पार्टी (सपा), राष्ट्रीय जनता दल (आरजेडी) और वामपंथी दलों (लेफ्ट) ने कांग्रेस की एकतरफा और मनमानी राजनीति को गठबंधन की एकजुटता के लिए बेहद नुकसानदेह बताया। नेताओं का साफ कहना था कि कांग्रेस में समावेशी नेतृत्व की कमी साफ दिख रही है, जिससे सहयोगियों के बीच का भरोसा लगातार कमजोर हो रहा है।
तमिलनाडु की सियासत और डीएमके का मुद्दा छाया रहा
इस बैठक के दौरान सबसे ज्यादा गरमा-गरमी तमिलनाडु की राजनीति और वहां के सत्ताधारी दल डीएमके (DMK) को लेकर हुई। सहयोगियों ने इस बात पर कड़ा ऐतराज जताया कि कांग्रेस ने तमिलनाडु में डीएमके जैसी पुरानी और मजबूत साथी को नजरअंदाज कर अभिनेता विजय की नई पार्टी 'टीवीके' (TVK) के साथ नजदीकियां बढ़ा ली हैं। माकपा (CPM) सांसद जॉन ब्रिटास ने कांग्रेस के इस कदम को सीधे तौर पर एक विश्वासघात करार दिया। उन्होंने कांग्रेस को याद दिलाते हुए कहा कि जिस तरह का बर्ताव डीएमके प्रमुख एमके स्टालिन के साथ किया जा रहा है, वैसा ही बर्ताव पहले जेडीयू नेता नीतीश कुमार के साथ भी किया गया था, जिसके बाद हताश होकर उन्होंने गठबंधन छोड़ दिया था। बैठक में यह चिंता साफ तौर पर उभरी कि कांग्रेस के ये एकतरफा फैसले विपक्षी एकता की नींव को हिला रहे हैं।
राहुल गांधी की प्रतिक्रिया और सोनिया गांधी की चुप्पी
सहयोगी दलों द्वारा उठाए गए इन तीखे सवालों और अपनी आलोचनाओं पर कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने बेहद सधे हुए अंदाज में अपनी बात रखते हुए कहा कि वे इन सभी आलोचनाओं को मुस्कुराकर स्वीकार करते हैं। इसके साथ ही उन्होंने सभी विपक्षी दलों से मतभेदों को भुलाकर एकजुट रहने की अपील की और कहा कि जनता के हक के लिए सड़क से लेकर संसद तक मिलकर एक संयुक्त संघर्ष खड़ा करना होगा। इस पूरी बैठक के दौरान कांग्रेस संसदीय दल की अध्यक्ष सोनिया गांधी भी वहां मौजूद रहीं, लेकिन उन्होंने पूरी चर्चा को केवल शांति से सुना और कोई भी टिप्पणी करने से बचती नजर आईं।
ममता बनर्जी का आक्रामक अंदाज और उद्धव ठाकरे की मौजूदगी
बैठक में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी का रूप काफी आक्रामक रहा। उन्होंने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया कि उनकी पार्टी के साथ लगातार अन्याय किया जा रहा है, इसलिए सभी विपक्षी दलों को मिलकर चुनाव आयोग का घेराव करना चाहिए। वहीं, शिवसेना (उद्धव गुट) के प्रमुख उद्धव ठाकरे शारीरिक रूप से इस बैठक में उपस्थित नहीं हो सके, लेकिन वे वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए वर्चुअली इस चर्चा का हिस्सा बने।
आपसी तालमेल सुधारने के लिए हर दो महीने में होगी बैठक
बैठक के आखिरी चरण में सभी विपक्षी दलों ने आपस में संवाद और बेहतर समन्वय की कमी पर गहरी चिंता व्यक्त की। इस कमजोरी को दूर करने और आपसी अविश्वास को खत्म करने के लिए गठबंधन ने एक बड़ा फैसला लिया है। इसके तहत अब 'INDIA' गठबंधन के तमाम बड़े नेता हर दो महीने में अनिवार्य रूप से बैठक करेंगे। इसी कड़ी में गठबंधन की अगली बड़ी बैठक आने वाले अगस्त महीने में हैदराबाद में आयोजित करने का फैसला लिया गया है।
अमरनाथ यात्रा पर गई महिला, पीछे से घर में घुसे चोर; लाखों का माल लेकर फरार
कल्याण बनर्जी के खिलाफ सख्त कदम, पूरे मानसून सत्र तक लोकसभा में एंट्री पर रोक
भीषण सड़क हादसे से दहला पठानकोट, दो की मौत के बाद भड़का लोगों का गुस्सा
वकीलों ने खोला सरकार के खिलाफ मोर्चा, दिल्ली लाठीचार्ज पर कानपुर में गरजा विरोध
जिम्बाब्वे ने किया स्क्वॉड का ऐलान, डेब्यू का इंतजार खत्म; त्सिगा पहली बार टीम में