सिंहस्थ 2028: धार्मिक, तकनीकी और पर्यावरणीय तीनों दृष्टियों से नई पहचान
उज्जैन। उज्जैन में सिंहस्थ 2028 को लेकर तैयारी लगातार चल रही है। वहीं महाकाल मंदिर परिसर का कायाकल्प तेज़ी से होता नजर आ रहा है। भक्तों की सुविधा और भीड़ प्रबंधन को ध्यान में रखते हुए महाकालेश्वर मंदिर का आंगन तीन गुना बढ़ा दिया गया है। पहले जहां मंदिर परिसर 25 हजार वर्गफीट में सीमित था, अब यह 78 हजार वर्गफीट क्षेत्र में फैला होगा।
1400 करोड़ की लागत से हो रहा विस्तार
महाकाल परिसर का यह भव्य विस्तार तीन चरणों में किया जा रहा है। पहले और दूसरे फेस में अब तक 1102 करोड़ रुपए की लागत से काम पूरे हो चुके हैं, जबकि तीसरे फेस के लिए 300 करोड़ का बजट निर्धारित किया गया है। मंदिर प्रांगण विस्तार के बाद सिंहस्थ 2028 के दौरान प्रतिदिन 10 लाख श्रद्धालुओं महाकाल के दर्शन कर सकेंगे। पिछले सिंहस्थ 2016 में एक दिन में करीब 1 लाख श्रद्धालु दर्शन करने पहुंचे थे, जबकि इस बार संख्या 10 गुना तक बढ़ने का अनुमान है।
भक्तों को कम समय में होंगे दर्शन
दर्शनार्थियों की भीड़ को नियंत्रित करने के लिए मंदिर परिसर में 10 मार्ग तैयार किए जा चुके हैं, जिन्हें आवश्यकता पड़ने पर 15 तक बढ़ाया जाएगा. दर्शन मार्ग इस तरह से बनाए जा रहे हैं कि भक्तों को कम समय में और सहजता से दर्शन हो सकें। इसके साथ ही सदावल में नया हेलीपेड भी तैयार किया जा रहा है, ताकि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधा मिल सके।
IIM इंदौर को मिला भीड़ प्रबंधन का जिम्मा
पहली बार महाकाल मंदिर में भीड़ प्रबंधन और क्राउड कंट्रोल की जिम्मेदारी भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIM) इंदौर को सौंपी गई है। IIM की विशेषज्ञ टीम उज्जैन में होने वाले बड़े पर्व, त्योहार और महाकाल सवारी के दिनों में शहर में आकर ट्रैफिक, पार्किंग और श्रद्धालुओं की आवाजाही का अध्ययन करेगी। इस अध्ययन के आधार पर एक आधुनिक प्रबंधन योजना तैयार की जाएगी।
मुख्यमंत्री ने बताया ‘अनोखा मंदिर’
हाल ही में उज्जैन में हुए स्पिरिचुअल समिट के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि महाकाल मंदिर दुनिया का इकलौता ऐसा मंदिर है, जो 1000 बीघा में फैला हुआ है। सीएम ने कहा कि महाकाल लोक, रुद्रसागर और मंदिर परिसर मिलकर उज्जैन को धार्मिक पर्यटन की विश्व स्तरीय पहचान दिला रहे हैं।
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