पशु सखियों के प्रशिक्षण से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को नई दिशा
रायपुर : छत्तीसगढ़ में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने और पशुपालन आधारित आजीविका को सशक्त करने की दिशा में एक प्रभावी पहल सामने आई है। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के अंतर्गत प्रदेशभर में “पशु सखी” मॉडल के जरिए महिलाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाया जा रहा है, जिससे वे अपने साथ-साथ अन्य ग्रामीण परिवारों की आय बढ़ाने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं।
इसी क्रम में बलरामपुर जिले में 30 पशु सखियों के लिए 17 दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया जा रहा है। यह प्रशिक्षण ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान में संचालित हो रहा है, जहां उन्हें पशुपालन से जुड़ी आधुनिक तकनीकों और व्यावहारिक पहलुओं की गहन जानकारी दी जा रही है।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों द्वारा पशुओं की समुचित देखभाल, संतुलित आहार प्रबंधन, नियमित टीकाकरण, नस्ल सुधार, रोगों की पहचान एवं प्राथमिक उपचार जैसी महत्वपूर्ण जानकारियां दी जा रही हैं। साथ ही पशु चिकित्सालय एवं गौशालाओं के भ्रमण के माध्यम से पशु सखियों को जमीनी स्तर पर पशुधन प्रबंधन की व्यवहारिक समझ विकसित कराई जा रही है।
जिला पंचायत बलरामपुर की मुख्य कार्यपालन अधिकारी नयनतारा सिंह तोमर ने बताया कि पशुपालन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ है और “पशु सखी” जैसी पहलें महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त बनाने में मील का पत्थर साबित हो रही हैं। उनके माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में पशुपालकों को समय पर मार्गदर्शन और सेवाएं मिलेंगी, जिससे उत्पादन और आय दोनों में वृद्धि होगी।
प्रदेश में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम न केवल महिलाओं को स्वरोजगार के अवसर प्रदान कर रहे हैं, बल्कि स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, पशुधन स्वास्थ्य सुधार और सतत ग्रामीण विकास को भी गति दे रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त पशु सखियां अपने-अपने गांवों में पशुपालन सेवाओं की महत्वपूर्ण कड़ी बनकर उभरेंगी और आत्मनिर्भर छत्तीसगढ़ के निर्माण में अहम योगदान देंगी।
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